यार तुम भी कमाल करते हो,
आपके बाद किसको चाहेंगे,
या ख़ुदा क्या सवाल करते हो,
कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ,
अब क्यों झूठा मलाल करते हो,
इक तरफ़ हमसे प्यार की बातें,
और फिर यूं हलाल करते हो,
हाय आदत ये बेनियाज़ी की,
उस पे दावा ख़याल करते हो।
दिलों के मसले भी कितने अजीब- ओ- हाल मिले,
वहीं है चैन भी ठोकर जहां हज़ार मिले,
करे जो कोई गिला तो गले लगा लो उसे,
नहीं ये कोई मोहब्बत जो बार बार मिले,
तमाम उम्र की दौलत को छोड़ चल दीजे,
जो उसकी राह पे चलने को एक बार मिले,
कि जिनको छोड़ के आए थे उम्र भर के लिए,
हर एक शय में ज़माने की बार बार मिले,
यही निज़ाम है महफ़िल में उसकी सबके लिए,
हमीं नहीं हैं जिसे दर्द बेशुमार मिले।
नज़र उठाई जो खुद से तो हमने ये पाया
हमीं नहीं हैं जिसे दर्द बेशुमार मिले।
कितनी शर्तों पे प्यार करते हो, यार तुम भी कमाल करते हो, आपके बाद किसको चाहेंगे, या ख़ुदा क्या सवाल करते हो, कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ, अब क्...