सोमवार, 3 नवंबर 2025

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,
यार तुम भी कमाल करते हो,

आपके बाद किसको चाहेंगे,
या ख़ुदा क्या सवाल करते हो,

कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ,
अब क्यों झूठा मलाल करते हो,

इक तरफ़ हमसे प्यार की बातें,
और फिर यूं हलाल करते हो,

हाय आदत ये बेनियाज़ी की,
उस पे दावा ख़याल करते हो।

हम जिएं या न जिएं पल तो गुज़र जाते हैं

हम जिएं या न जिएं पल तो गुज़र जाते हैं ,
रेत की तरह हथेली से फिसल जाते हैं ,

दिल के एहसास को आवाज़ बनाते चलिये,
वक्त के साये में ये धूप से ढल जाते हैं,

हम नहीं होंगे तो फिर किससे शिकायत होगी,
दिल जो भर आए तो ये सोच के रुक जाते हैं,

तुझ पे इल्ज़ाम ही क्यों हो मेरे दर्द-ओ ग़म का,
मेरे हिस्से में लिखे होंगे तो मिल जाते हैं,

हम किसी और से क्यों माॅंगें  खु़दा के होते
उसकी रहमत हो तो खुद रस्ते निकल आते है

रविवार, 26 अक्टूबर 2025

काश फिर दिल मेरा बातों से तेरी दुखने लगे

काश फिर दिल मेरा बातों से तेरी दुखने लगे
तो ये मुमकिन है कि ये दूरियां भी घटने लगे

अपने मतलब से मेरे खा़स हुआ करते थे
वही अहबाब मेरे मुझको बुरा कहने लगे

एक हम हैं जो  मिटे जाते हैं उनकी खा़तिर
एक वो हैं कि हमें दुश्मन ए जां कहने लगे

गौहर ए अश्क़ जो सीने में सजो रखें थे
ग़ैर के ग़म का बहाना मिला बस बहने लगे







मंगलवार, 30 सितंबर 2025

आदमी है प्यार में

जीत जैसा खुश हो कोई जब हार के तक़रार में ,
तब समझ लीजेगा अब ये आदमी है प्यार में ,

अब तलक़ जो हैं मरासिम दांव पर लग जाएंगे,
बस यही एक कश्मकश है प्यार के इज़हार में,

खामखां की सारी ख़बरें पहले पन्ने पर छपीं,
असली मुद्दा ही नहीं था बस कहीं अख़बार में ,

एक बस उसकी कमी फिर  कोई भर पाया नहीं,
कहने को क्या कुछ नहीं था इस भरे संसार में ,

वो नगीना तो वहीं था मेरी तुलसी के तले,
उम्र भर भटका किए जिसके लिए बाज़ार में।

सोमवार, 29 सितंबर 2025

हवा हो ज़िद पे तो क्या कश्ती बढ़ाए रखिये,

हवा हो ज़िद पे तो क्या कश्ती बढ़ाए रखिये,
तीरगी लाख़ सही शम्मा जलाए रखिए ,

मिलेंगे आड़ में मलहम के कई ज़ख्म नए,
अपने हालात ज़माने से छुपाए रखिए ,

याद रखने का हुनर अपनी जगह है लेकिन ,
यहां जीने के लिए बातें भुलाए रखिए ,

इतना आसान नहीं होता बुलंदी का सफ़र,
आप मायूस न हों, जज़्बा बनाए रखिए,

दांव आने भी ज़रूरी हैं ज़माने के मगर ,
कुछ तो सादा दिली भी खुद में बचाए रखिए ,

कितना आसान है लोगों पे हुकूमत करना,
फ़ालतू मुद्दों पे बस उनको लड़ाए रखिए ।

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

अब खुशी तेरी मेरे साथ नहीं,

अब खुशी तेरी मेरे साथ नहीं,
इसके आगे  तो कोई बात नहीं,

कर दिए आज ख़त्म सारे गिले,
रतजगे और  एक  रात  नहीं,

उसकी खातिर तो जां भी हाज़िर है ,
चंद ख़्वाबों की कुछ बिसात नहीं ,

ये तरीका भी  बेअसर  ही रहा,
ग़म से राहत मिली निजात नहीं,

आपका साथ चाहिए था बस ,
छोड़िए  खै़र ,कोई  बात  नहीं ।

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

दिल के एहसास को आवाज़ बनाते चलिये,

हम जिएं या न जिएं पल तो गुज़र जाते हैं ,
रेत की तरह हथेली से फिसल जाते हैं ,

दिल के एहसास को आवाज़ बनाते चलिये,
वक्त के साये में में धूप से ढल जाते हैं,

हम नहीं होंगे तो फिर किस से शिकायत होगी,
दिल जो भर आए तो ये सोच के रुक जाते हैं,

तुझ पे इल्ज़ाम ही क्यों हो मेरे दर्द-ओ ग़म का,
मेरे हिस्से में लिखे होंगे तो मिल जाते हैं,

हम किसी और से क्यों माॅंगें  खु़दा के होते,
उसकी रहमत हो तो खुद रस्ते निकल आते है।

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

तिनका तिनका

तिनका तिनका मिली खुशी मुझको,
टुकड़ों टुकड़ों में ज़िंदगी मुझको,

तुम मेरे साथ ही तो रहते हो,
फिर क्यों लगते हो अजनबी मुझको,

सबको ख़ुद अपना ख्याल रखना है,
दे गई सीख ज़िंदगी मुझको,

आप इस बार भी नहीं बदले,
एक यही बात छू गई दिल को ,

बस यही बात लग गई दिल को

भला मैं और इस बुलंदी पर,
बस यही बात खल गई उसको,

उम्र भर न जो सुलझ पाएगी
दे गया है वो पहेली मुझको 




तिनका तिनका मिली खुशी मुझको,
टुकड़ों टुकड़ों में ज़िंदगी मुझको,

तुम मेरे साथ ही तो रहते हो,
फिर क्यों लगते हो अजनबी मुझको,

सबको ख़ुद अपना ख्याल रखना है,
दे गई सीख ज़िंदगी मुझको,

आप इस बार भी नहीं बदले,
एक यही बात लग गई दिल को ,

एक मैं और इस बुलंदी पर,
बस यही बात खल गई उसको,

निधि बाजपेई

मंगलवार, 1 जुलाई 2025

दिलों के मसले

दिलों  के मसले भी कितने अजीब- ओ- हाल मिले,

वहीं है चैन भी ठोकर जहां हज़ार मिले,


करे जो कोई गिला तो गले लगा लो उसे,

नहीं ये कोई मोहब्बत जो बार बार मिले,


तमाम उम्र की दौलत को छोड़ चल दीजे,

जो उसकी राह पे चलने को एक बार मिले,


कि जिनको छोड़ के आए थे उम्र भर के लिए,

हर एक शय में ज़माने की बार बार मिले,


यही निज़ाम है महफ़िल में उसकी सबके लिए,

हमीं नहीं हैं जिसे दर्द बेशुमार मिले।


नज़र उठाई जो खुद से तो हमने ये पाया 

हमीं नहीं हैं जिसे दर्द बेशुमार मिले।

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025

तिनका तिनका मिली खुशी मुझको,
टुकड़ों टुकड़ों में ज़िंदगी मुझको,

तुम मेरे साथ ही तो रहते हो,
फिर क्यों लगते हो अजनबी मुझको,

सबको ख़ुद अपना ख्याल रखना है,
दे गई सीख ज़िंदगी मुझको,

आप इस बार भी नहीं बदले,
एक यही बात लग गई दिल को ,

भला मैं और इस बुलंदी पर,
बस यही बात खल गई उसको ।

निधि बाजपेई 🙏🙏

बुधवार, 9 अप्रैल 2025

मुझको पता न था

कर के भरोसा खुद पे चल तो दिए लेकिन
ले जायेगा ये सफ़र कहां मुझको पता न था

मिलने को मिल जाएंगे दोनों जहां मगर
बस वो नहीं मिलेगा मुझको पता न था

हर शय में जिसे ढूंढते फिरते रहे हैं हम
वो मुझ में ही छुपा है मुझको पता न था

जो दे रहा है शख़्स मुझे ज़ुर्म की सजा
वो खुद मेरी तरह ही था कोई देवता न था 

कल रात ही तो छोड़ कर आया था गेट तक
वो फिर नहीं मिलेगा मुझको पता न था

गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

राज़ दिल में दबा के रखियेगा,

राज़ दिल में दबा के रखियेगा,
जान लेते हैं जानने वाले,

कर के एहसान भूल जाया करें,
मान ही लेंगे मानने वाले,

कैसे कह दूॅं बुरी है ये दुनियाॅं,
कैसे कह दें ज़माने भर को बुरा,
हमने देखें है चाहने वाले,

आप खु़द पर यकीन करिए तो,
आइना ही हैं सामने वाले,

तुम्हारा साथ हमने खो के जाना

तुम्हारा साथ हमने खो के जाना,
तुम्हारा साथ था कितना ज़रूरी

रहेगा फ़र्क क्या औरों में तुम में,
जो तुमसे भी रहें बातें अधूरी,

किसी दिन राय अपनी भी तो रखो ( रखिए )
करोगे कब तलक ये जी हुज़ूरी (करेंगे )

नहीं हो पाए तो फिर छोड़ देना,
कोई भी शय नहीं तुमसे ज़रूरी,

निगाहों में जो इतनी बेकली है,
कोई तो बात है लब पर अधूरी,

थे कैसे फा़सले जो मिट न पाए,
रही कुर्बत में भी एक आला दूरी,( अनजानी दूरी )

गुज़ारा कर रहे हैं करने वाले,
लिए दिल में कई ख़्वाहिश अधूरी।

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो, यार तुम भी कमाल करते हो, आपके बाद किसको चाहेंगे, या ख़ुदा क्या सवाल करते हो, कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ, अब क्...