ले जायेगा ये सफ़र कहां मुझको पता न था
मिलने को मिल जाएंगे दोनों जहां मगर
बस वो नहीं मिलेगा मुझको पता न था
हर शय में जिसे ढूंढते फिरते रहे हैं हम
वो मुझ में ही छुपा है मुझको पता न था
जो दे रहा है शख़्स मुझे ज़ुर्म की सजा
वो खुद मेरी तरह ही था कोई देवता न था
कल रात ही तो छोड़ कर आया था गेट तक
वो फिर नहीं मिलेगा मुझको पता न था
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