बुधवार, 9 अप्रैल 2025

मुझको पता न था

कर के भरोसा खुद पे चल तो दिए लेकिन
ले जायेगा ये सफ़र कहां मुझको पता न था

मिलने को मिल जाएंगे दोनों जहां मगर
बस वो नहीं मिलेगा मुझको पता न था

हर शय में जिसे ढूंढते फिरते रहे हैं हम
वो मुझ में ही छुपा है मुझको पता न था

जो दे रहा है शख़्स मुझे ज़ुर्म की सजा
वो खुद मेरी तरह ही था कोई देवता न था 

कल रात ही तो छोड़ कर आया था गेट तक
वो फिर नहीं मिलेगा मुझको पता न था

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