शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

अब खुशी तेरी मेरे साथ नहीं,

अब खुशी तेरी मेरे साथ नहीं,
इसके आगे  तो कोई बात नहीं,

उसकी खातिर तो जां भी हाज़िर है ,
चंद ख़्वाबों की कुछ बिसात नहीं ,


कर दिए आज ख़त्म सारे गिले,
रतजगे और  एक  रात  नहीं,

उसकी खातिर तो जां भी हाज़िर है ,
चंद ख़्वाबों की कुछ बिसात नहीं ,

ये तरीका भी  बेअसर  ही रहा,
ग़म से राहत मिली निजात नहीं,

आपका साथ चाहिए था बस ,
छोड़िए  खै़र, कोई  बात  नहीं ।

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