तीरगी लाख़ सही शम्मा जलाए रखिए ,
मिलेंगे आड़ में मलहम के कई ज़ख्म नए,
अपने हालात ज़माने से छुपाए रखिए ,
याद रखने का हुनर अपनी जगह है लेकिन ,
यहां जीने के लिए बातें भुलाए रखिए ,
इतना आसान नहीं होता बुलंदी का सफ़र,
आप मायूस न हों, जज़्बा बनाए रखिए,
दांव आने भी ज़रूरी हैं ज़माने के मगर ,
कुछ तो सादा दिली भी खुद में बचाए रखिए ,
कितना आसान है लोगों पे हुकूमत करना,
फ़ालतू मुद्दों पे बस उनको लड़ाए रखिए ।
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