टुकड़ों टुकड़ों में ज़िंदगी मुझको,
तुम मेरे साथ ही तो रहते हो,
फिर क्यों लगते हो अजनबी मुझको,
सबको ख़ुद अपना ख्याल रखना है,
दे गई सीख ज़िंदगी मुझको,
आप इस बार भी नहीं बदले,
एक यही बात छू गई दिल को ,
बस यही बात लग गई दिल को
भला मैं और इस बुलंदी पर,
बस यही बात खल गई उसको,
उम्र भर न जो सुलझ पाएगी
दे गया है वो पहेली मुझको
तिनका तिनका मिली खुशी मुझको,
टुकड़ों टुकड़ों में ज़िंदगी मुझको,
तुम मेरे साथ ही तो रहते हो,
फिर क्यों लगते हो अजनबी मुझको,
सबको ख़ुद अपना ख्याल रखना है,
दे गई सीख ज़िंदगी मुझको,
आप इस बार भी नहीं बदले,
एक यही बात लग गई दिल को ,
एक मैं और इस बुलंदी पर,
बस यही बात खल गई उसको,
निधि बाजपेई
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