मंगलवार, 30 सितंबर 2025

आदमी है प्यार में

जीत जैसा खुश हो कोई जब हार के तक़रार में ,
तब समझ लीजेगा अब ये आदमी है प्यार में ,

अब तलक़ जो हैं मरासिम दांव पर लग जाएंगे,
बस यही एक कश्मकश है प्यार के इज़हार में,

खामखां की सारी ख़बरें पहले पन्ने पर छपीं,
असली मुद्दा ही नहीं था बस कहीं अख़बार में ,

एक बस उसकी कमी फिर  कोई भर पाया नहीं,
कहने को क्या कुछ नहीं था इस भरे संसार में ,

वो नगीना तो वहीं था मेरी तुलसी के तले,
उम्र भर भटका किए जिसके लिए बाज़ार में।

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