रविवार, 26 अक्टूबर 2025

काश फिर दिल मेरा बातों से तेरी दुखने लगे

काश फिर दिल मेरा बातों से तेरी दुखने लगे
तो ये मुमकिन है कि ये दूरियां भी घटने लगे

अपने मतलब से मेरे खा़स हुआ करते थे
वही अहबाब मेरे मुझको बुरा कहने लगे

एक हम हैं जो  मिटे जाते हैं उनकी खा़तिर
एक वो हैं कि हमें दुश्मन ए जां कहने लगे

गौहर ए अश्क़ जो सीने में सजो रखें थे
ग़ैर के ग़म का बहाना मिला बस बहने लगे







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