शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025

तिनका तिनका मिली खुशी मुझको,
टुकड़ों टुकड़ों में ज़िंदगी मुझको,

तुम मेरे साथ ही तो रहते हो,
फिर क्यों लगते हो अजनबी मुझको,

सबको ख़ुद अपना ख्याल रखना है,
दे गई सीख ज़िंदगी मुझको,

आप इस बार भी नहीं बदले,
एक यही बात लग गई दिल को ,

भला मैं और इस बुलंदी पर,
बस यही बात खल गई उसको ।

निधि बाजपेई 🙏🙏

बुधवार, 9 अप्रैल 2025

मुझको पता न था

कर के भरोसा खुद पे चल तो दिए लेकिन
ले जायेगा ये सफ़र कहां मुझको पता न था

मिलने को मिल जाएंगे दोनों जहां मगर
बस वो नहीं मिलेगा मुझको पता न था

हर शय में जिसे ढूंढते फिरते रहे हैं हम
वो मुझ में ही छुपा है मुझको पता न था

जो दे रहा है शख़्स मुझे ज़ुर्म की सजा
वो खुद मेरी तरह ही था कोई देवता न था 

कल रात ही तो छोड़ कर आया था गेट तक
वो फिर नहीं मिलेगा मुझको पता न था

गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

राज़ दिल में दबा के रखियेगा,

राज़ दिल में दबा के रखियेगा,
जान लेते हैं जानने वाले,

कर के एहसान भूल जाया करें,
मान ही लेंगे मानने वाले,

कैसे कह दूॅं बुरी है ये दुनियाॅं,
कैसे कह दें ज़माने भर को बुरा,
हमने देखें है चाहने वाले,

आप खु़द पर यकीन करिए तो,
आइना ही हैं सामने वाले,

तुम्हारा साथ हमने खो के जाना

तुम्हारा साथ हमने खो के जाना,
तुम्हारा साथ था कितना ज़रूरी

रहेगा फ़र्क क्या औरों में तुम में,
जो तुमसे भी रहें बातें अधूरी,

किसी दिन राय अपनी भी तो रखो ( रखिए )
करोगे कब तलक ये जी हुज़ूरी (करेंगे )

नहीं हो पाए तो फिर छोड़ देना,
कोई भी शय नहीं तुमसे ज़रूरी,

निगाहों में जो इतनी बेकली है,
कोई तो बात है लब पर अधूरी,

थे कैसे फा़सले जो मिट न पाए,
रही कुर्बत में भी एक आला दूरी,( अनजानी दूरी )

गुज़ारा कर रहे हैं करने वाले,
लिए दिल में कई ख़्वाहिश अधूरी।

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो, यार तुम भी कमाल करते हो, आपके बाद किसको चाहेंगे, या ख़ुदा क्या सवाल करते हो, कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ, अब क्...