हों लाख ग़म ,चलो खुल के खिलखिलाया जाए,
जलने वालों को ज़रा और जलाया जाए ,
तुम्हारी मेरी दलीलों की न सुनवायी होगी,
अब किसी रोज़ फैसला ही सुनाया जाए ,
जलने वालों को ज़रा और जलाया जाए ,
तुम्हारी मेरी दलीलों की न सुनवायी होगी,
अब किसी रोज़ फैसला ही सुनाया जाए ,
न मुहब्बत, न शिकायत ही नज़र आती है ,
बड़ी कुर्बत है कुछ फ़ासला बनाया जाए ,
माना कि तेरी महफि़ल में कुछ काम नहीं अपना,
अब हम वो भी तो नहीं हैं, कि न बुलाया जाए,
माना कि तेरी महफि़ल में कुछ काम नहीं अपना,
अब हम वो भी तो नहीं हैं, कि न बुलाया जाए,
जो मेरे ऐब गिनाने का हुनर रखते हैं ,
किसी बहाने सही उन्हें , आइना भी दिखाया जाए,
किसी बहाने सही उन्हें , आइना भी दिखाया जाए,
जिदंगी बेस्वाद हो जायेगी बस हक़ीक़त से बनी ,
इसमें थोड़ा ही सही ,नमक ख़्वाबों का मिलाया जाये।
निधि बाजपेई
वाह्ह्ह..लाज़वाब...👌👌
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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