मंगलवार, 11 जुलाई 2023

छुपा के दर्द को जीना सभी को आता है

छुपा के दर्द को जीना सभी को आता है,
अजीब दौर है  हर  शख़्स मुस्कुराता है,

बड़े मुंसिफ़ थे ,नासेह थे ज़माने भर में,
आप अपने पे जो बीते समझ में आता है,

कभी नाराज़ हो जाए तो नज़रें फेर लेता था,
कि मिलता है वो अब जब भी गले लगाता है,

कभी मिल जायेगा यूॅंही तो इतना पूछेंगे,
क्या रूठता है वो अब भी,कोई मानता है, 

कोई रिश्ता तो नही है मगर हक़ है फिर भी,
अब आपको क्या बताएं  ये  कैसा  नाता है।

अगर तुम चाह लो दिल से. ..

कि होने को तो क्या कहिये,क्या जादू हो नहीं सकता,
अगर तुम चाह लो दिल से ,तो क्या कुछ हो नहीं सकता,

कि देखे ही हैं क्या तुमने ,अभी मौसम ज़माने में,
अभी कहने को कहते हो ,मैं ऐसा हो नहीं सकता,

कभी जो खुद पे गुज़रेगी , हकीकत वो भी समझेंगे,
बड़ी आसानी से कहते हैं कि अब कुछ हो नहीं सकता,

चलो इस बार  कोई एक बहाना  ढूंढ लें  हम भी,
कि एक दूजे के बिन अपना गुज़ारा हो नहीं सकता,

किसी मां  के लिए  इससे बड़ा  बटवारा क्या होगा,
कि बच्चे आपस में कहते हैं ये रिश्ता चल नही सकता।

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो, यार तुम भी कमाल करते हो, आपके बाद किसको चाहेंगे, या ख़ुदा क्या सवाल करते हो, कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ, अब क्...