अब भी शायद कोई उम्मीद दिल में बाकी है,
गुजर गई जो शाम क्या, रात बाकी है,
यूँ तोअरसा गुजर चुका है ,तुमसे बिछड़े हुए,
जाने क्यों फिर भी , मिलने की आस बाकी,
जो भी चाहा मेरे दामन में दे दिया उसने,
फिर भी एक तेरी, हाँँ तेरी ,चाह बाकी है,
सुना है मैंने कि सब कुछ भुला दिया तुमने,
मुझे यकीं है, कहीं मेरी याद बाकी है।
गुजर गई जो शाम क्या, रात बाकी है,
यूँ तोअरसा गुजर चुका है ,तुमसे बिछड़े हुए,
जाने क्यों फिर भी , मिलने की आस बाकी,
जो भी चाहा मेरे दामन में दे दिया उसने,
फिर भी एक तेरी, हाँँ तेरी ,चाह बाकी है,
सुना है मैंने कि सब कुछ भुला दिया तुमने,
मुझे यकीं है, कहीं मेरी याद बाकी है।
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