बुधवार, 7 सितंबर 2011

उन  राहों पे  जाना छोड़ दिया, उन गलियों से मुहंँ मोड़ लिया,
उन दहलीज़ों और दरवाज़ों  से,  हमने  हर  नाता  तोड़ लिया,

हर ख्वाहिश थी उनसे ही जुड़ी  और सपने थे बस उनके लिए,
अब  दिल  में  तमन्ना, आँखों में ख्वाबों को लाना छोड़ दिया,

जब जो भी मिला धोखा ही दिया, मजबूर किया,दिल तोड़ दिया,
अब ग़ैर  तो  ग़ैर  अपनों  से  भी  हमने ,हाँथ मिलाना छोड़ दिया,


उनसे ही थी रंगत महफ़िल में ,उनसे ही थी रौनक दुनिया मेरी,
अब उन अंधियारे  मयखानों की, महफ़िलों में जाना छोड़ दिया,

सौ  बार  गिरे , सौ  बार  उठे  ,सौ  बार  बटोरें  हैं  टुकड़े,
अब ज़ार हुआ,दिल तार हुआ,तो दिल का लगाना छोड़ दिया।

शनिवार, 23 जुलाई 2011

काश की जिंदगी...

काश की ज़िंदगी थोड़ी सी तो अपनी होती,
हर  एक ऑंसू  के  पीछे  छुपी खुशी  होती,

मोल  दौलत  का  अगर होता  नहीं  दुनिया  में,
तो यह मुमकिन था कि इंसान की कीमत होती,

रिश्ते बिकते नहीं बाजार में सिक्कों के एवज़,
हर एक ज़र्रे में  जो  थोड़ी  सी मोहब्बत होती,

सिर्फ  चेहरा  नहीं  इंसान  का  देखा जाता,
प्यार की एक नज़र दिल के भी तरफ़ होती,

इतनी मजबूरियाॅं न होतीं अगर  जीवन में,
तो ज़िंदगी  की  सूरत  कहीं बेहतर  होती।


                        
     

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

अब भी शायद कोई उम्मीद....

अब भी शायद कोई उम्मीद दिल में बाकी है,
गुजर  गई  जो  शाम  क्या, रात  बाकी  है,

यूँ तोअरसा गुजर चुका है ,तुमसे बिछड़े हुए,
जाने क्यों  फिर  भी , मिलने की आस बाकी,

जो भी चाहा मेरे दामन में दे दिया उसने,
फिर भी एक तेरी, हाँँ तेरी ,चाह बाकी है,

सुना है मैंने कि सब कुछ भुला दिया तुमने,
मुझे  यकीं  है, कहीं  मेरी  याद  बाकी है।


आऐंगी याद हर पल इस वक्त की बातें,                
           बेफिक्र  जमाने    से   बेवक्त  की  बातें,                
आँखो  में नमी होगी, होठों पे हँसी  होगी,
           जिस वक्त  भी याद आऐंगी,  इस वक्त  की बातें। 
       

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो, यार तुम भी कमाल करते हो, आपके बाद किसको चाहेंगे, या ख़ुदा क्या सवाल करते हो, कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ, अब क्...