रविवार, 1 अक्टूबर 2017

प्रतिकूल समय जब आता है, भला भी बुरा कहलाता है,
ग्रहण  पड़े  तो  तेज  सूर्य का भी  फीका पड़ जाता है।

क्यों बात किसी की बुरा मान, यूँ मुँह लटकाए बैठे हो,
अरे !ये वो संसार है जिसमें ,भगवान भी कोसा जाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज  सूर्य का भी फीका पड़ जाता है ......

हर धूप के बाद अंधेरा है, हर  रात  के  बाद सवेरा है,
जो समझ गया इस फेरे को ,बस वही सफलता पाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है .....

जो दर्द बाँट ले औरों के और अपनी कह के हँसा सके,
वो माला-धाला  जपे  बिना इंसान अमर हो जाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है.....

चढ़ते सूरज को सारी दुनिया नतमस्तक हो जाती है,
जो तम में उजियारा भर दे ,इंसान  खुदा  बन  जाता।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी जाता है......

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो,

कितनी शर्तों पे प्यार करते हो, यार तुम भी कमाल करते हो, आपके बाद किसको चाहेंगे, या ख़ुदा क्या सवाल करते हो, कहने आए थे ,कह लिया सबकुछ, अब क्...