प्रतिकूल समय जब आता है, भला भी बुरा कहलाता है,
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है।
क्यों बात किसी की बुरा मान, यूँ मुँह लटकाए बैठे हो,
अरे !ये वो संसार है जिसमें ,भगवान भी कोसा जाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है ......
हर धूप के बाद अंधेरा है, हर रात के बाद सवेरा है,
जो समझ गया इस फेरे को ,बस वही सफलता पाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है .....
जो दर्द बाँट ले औरों के और अपनी कह के हँसा सके,
वो माला-धाला जपे बिना इंसान अमर हो जाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है.....
चढ़ते सूरज को सारी दुनिया नतमस्तक हो जाती है,
जो तम में उजियारा भर दे ,इंसान खुदा बन जाता।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी जाता है......
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है।
क्यों बात किसी की बुरा मान, यूँ मुँह लटकाए बैठे हो,
अरे !ये वो संसार है जिसमें ,भगवान भी कोसा जाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है ......
हर धूप के बाद अंधेरा है, हर रात के बाद सवेरा है,
जो समझ गया इस फेरे को ,बस वही सफलता पाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है .....
जो दर्द बाँट ले औरों के और अपनी कह के हँसा सके,
वो माला-धाला जपे बिना इंसान अमर हो जाता है।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी फीका पड़ जाता है.....
चढ़ते सूरज को सारी दुनिया नतमस्तक हो जाती है,
जो तम में उजियारा भर दे ,इंसान खुदा बन जाता।
ग्रहण पड़े तो तेज सूर्य का भी जाता है......