शनिवार, 23 सितंबर 2017

अश्रु मेरे साथ हैं ...

तुम  साथ  दो  न  दो ,
अश्रु  मेरे   साथ   हैं ।

वेदना  से  जब  कभी,
व्यथित हुआ हृदय  मेरा,
अस्तित्व ही बिखरने  लगा,
आरोपों  के  प्रहार  से,
लेकर ये  अपनी  शरण में,
समेटते मुझे  हर  बार  हैं।

तुम  साथ दो  न  दो,
अश्रु  मेरे  साथ  हैं ।

जब  कभी पथ खो गया,
गहन अंधकार  में,
और मैं भटक गया
निराशा के  संसार  में,
आशाओं को फिर जगाकर,
देते दिलासा हर बार  हैं ।

तुम  साथ  दो  न  दो,
अश्रु  मेरे  साथ  हैं ।

 स्मृतियों में  डूबकर,
विरह में जब मन जला,
छोड़ दूँ संसार को क्या?
प्रश्न ने,  मन  को  छला,
तब हृदय  की  अग्नि  बुझाते,
देते शीतलता अपार  हैं।

तुम साथ  दो  न  दो,
अश्रु  मेरे  साथ  हैं ।

दर्द  में हँसी में
दुख में खुशी में
जीत  में  हार  में
धूप में छाव में
थाम  कर  हाथ  मेरा,
लगाते मुझे उस पार  हैं।

तुम  साथ  दो  न  दो ,
अश्रु  मेरे  साथ  हैं ।






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